माईग्रेन(आधासीसी) या आधे सिर का दर्द:-
:-जिस प्रकार मनुष्यों ने आधुनिकता के जगत में अपनी सुविधा के लिए बहुत सारे संसाधनो का निर्माण कर लिया है जिससे मनुष्यो ने शारीरिक व्यायाम कम कर अपने समय का उचित उपयोग न करने , ईधर-उधर घूमने , देर रात तक जगने, लेट उठने आदि आदतों को अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल कर लिया है जिस कारण से मनुष्यों ने अपने जीवन अनेक रोगों को विकसित कर दिया है उनमें से एक व्याधि(रोग) आजकल लोगो में बहुत अधिक सँख्या में देखने को मिलता है इससे भारतवर्ष ही नही बल्कि पूरा विश्व पीडित है। सामान्यतः लोग इसको समझ नही पा रहे है और तरह-तरह की पेन किलर टेबलेट्स खाते रहते है जिससे उनके शरीर मे कोई दूसरी बीमारी पनप जाती है आधुनिक मेडिकल साइन्स भी इसके मूल कारण को जानने में सक्षम नही है सामान्य रूप से अगर देखा जाये तो माईग्रेन या आधे सिर में दर्द होना कोई बीमारी नही है यह किसी अन्य बीमारी का उपलक्षण मात्र है।अर्थात यह किसी अन्य असाध्य रोग को हमारे शरीर में जगह दे रही होती है ।
जाने क्या है लक्षण:-
माईग्रेन अर्थात आधसीसी का दर्द सामान्य सिर दर्द की तुलना में बहुत तीव्र होता है यह सिर में कोई कील या कांटा चुभने के समान प्रहार करता है।
यह पूरे सिर में न होकर आधे सिर व आँख तक अपना प्रभाव दिखाता है इसमें रोगी अपने आपको एकान्त में ले जाने का प्रयास करता है।
इस अवस्था मे पीड़ित व्यक्ति को तेज़ रोशनी व किसी भी तरह की कोई आवाज़ से भी पीड़ा परेशानी होने लगती है। जिसको फोटोफोबिया व फोनोफोबिया की समस्या भी कहते है।
इसका प्रभाव 2घन्टे से लेकर 2-4दिन तक भी बना रहता है यह लगातार नही होता है यह कुछ-कुछ दिनों के अन्तराल पर होता रहता है।
इसमे व्यक्ति को जी मिचलाना, उल्टी जैसा मन होना,हृदय प्रदेश में पीड़ा, सिर व गर्दन की मांसपेशियों मे अकडन, कडवा पित्त निकलना व मूत्र निष्कासन में दिक्कत होना आदि लक्षण दिखाई देते है।
कारण:-
अधिकतर रोगो की तरह यह भी पेट से सम्बन्धित रोग है अतः पेट साफ रखें यह शरीर मे पित्त बढ़ने के कारण भी हो सकता है इसको पित्तज सिरोवेदना भी कहते है।
कुछ लोगो को गले से ऊपर के हिस्से में कफ बढ़ जाने के कारण ऑक्सिजन का प्रवाह ठीक से मस्तिष्क की ओर नही हो पाता है जिससे माईग्रेन की समस्या उतपन्न हो जाती है।
पेट मे गैस बनना ,ज्यादा समय तक खाली पेट रहना ,अधिक तैलीय , मिर्च मसालो वाले खाद्य पदार्थ खाना इस रोग का एक मुख्य कारण है।
मानसिक व भावनात्मक तनाव , नींद ठीक से ले पाना खान-पान का समय न होना अधिक बोलना भी सिर दर्द का बहुत बड़ा कारण है। जिससे सिर व मस्तिष्क में रक्त पहुंचाने वाली धमनियां बाधित होती है
यौगिक उपचार:-
माईग्रेन में मुख्यतः सिर की नस नाड़ियो को सबल बनाने के लिये भुजंगासन, पश्चिमोत्तानासन, वक्रासन, मत्स्यासन, व सूर्यनमस्कार आदि आसनो का अभ्यास किसी उचित योग शिक्षक के सानिध्य में सीखकर करना चाहिये।
गर्दन व कन्धों के शूक्ष्म व्यायाम करें।
प्राणायाम:-
प्राणायाम में मुख्य रूप से अनुलोम-विलोम का कम से कम 5-10 मिनट का अभ्यास करें।
शीतली प्राणायाम व ओंकार की पवित्र ध्वनि का उच्चारण करने से भी लाभ मिलेगा। यदि कफ़ बढा हुआ है तो शीतली प्राणायाम न करे।
सिर दर्द यदि तनाव के कारण है तो शवासन का अभ्यास भी जरूर करें।
आयुर्वेदिक व घरेलु उपचार:-
मेधावटी की एक-एक गोली सुबह-शाम गुनगुने पानी के साथ सेवन करें।
चार बादाम व एक अखरोट रात को पानी मे भिगोकर पीसकर सुबह खाली पेट दूध के साथ सेवन करने से लाभ होगा।
नाक में गाय का घी या बादाम का तेल डालने से भी सिर दर्द ठीक होता है।
रात को सोने से पहले सिर की मालिश व पैरो को साफ कर उनपर नारियल के तैल की मालिश करने से जल्दी ही आराम आने लगता है।





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