घुटने की समस्या:-
आज की इस आधुनिकता में अनियमित दिनचर्या ,खान-पान व शारीरिक व्यायाम की कमी होने के कारण सभी जनमानस के सामने कई गम्भीर शारीरिक समस्या उत्पन्न हो गयी है जिनमे से घुटने के दर्द कि समस्या बड़ी गम्भीर समस्याओं में से एक है सामान्यतया लोग इसके कारण को समझ नही पाते है डॉक्टरों के चक्कर काटते फिरते है कोई उनको कैल्शियम की कमी कोई घुटनों में गैप और कईं लोग तो घुटनों को रिप्लेस करवाने की सलाह तक दे देते है जिससे उनकी समस्या और बढ़ जाती है जिससे वह व्यक्ति अपने आपको तनावग्रस्त महसूस करने लगता है उसका आत्मविश्वास भी कम हो जाता है इसके साथ ही वह व्यक्ति कई बीमारियों से ग्रसित होने लगता है धन के साथ साथ वह अपने स्वास्थ्य को भी अपने हाथों से गवां देता है किन्तु हम यहाँ आपको इस समस्या से निपटने के लिये कुछ जरूरी दिनचर्या के नियम, योग , प्राणयाम व आयुर्वेदिक चिकित्सा के विषय मे बतायेंगे जिससे आप इस समस्या से आसानी से निजात पा सकते है किन्तु इससे पीड़ित व्यक्ति को धैर्य रखना अति आवश्यक होगा क्योंकि आत्मविश्वाशी व्यक्ति ही हर समस्याओं से पार पा सकता है।
कारण:-
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के अनुसार इसका मुख्य कारण मानसिक एवं भवनात्मक तनाव रहन-सहन ,खान-पान में असंयम होना बताया गया है
भोजन में अत्यधिक तैल घी, चर्बीदार पदार्थ जैसे माँस आदि।
अधिक दूध, चीनी व नमक का सेवन करना।
जीर्ण कब्ज और शारीरिक व्यायाम में कमी के कारण भी यह रोग उत्पन्न हो जाता है।
उपचार:-
शरीर मे पानी की मात्रा बढ़ाये दिन में कम से कम 3 लीटर पानी जरूर पियें।
उचित व्यायाम जैसे सूक्ष्म व्यायाम , पवनमुक्तासन,ताड़ासन, भुजंगासन, अर्ध शलभासन, चक्रासन, शशांकासन आदि नियमित करें। सूर्यनमस्कार अपनी सामर्थ्य के अनुसार करें।
कुंजल क्रिया करें विधि- उकडू बैठकर 4-5गिलास गुनगुना पानी सेंधा नमक डालकर पियें फिर सीधे खड़े होकर सामने की और झुककर दाएँ हाथ की मध्यमा व तर्जनी को मुख में डालते हुए जिह्वा के पिछले भाग पर दबाव डाले जिससे आपको उल्टी शुरू होगी तथा पेट का सम्पूर्ण जल बाहर आजायेगा पूरा जल इसी तरह से बाहर करना है इसके बाद थोड़ा शवासन लेना है ध्यान रहे आपके हाथ व नाखून साफ होने चाहिये।
नाड़ी शोधन व भस्त्रिका प्राणयाम कम से कम 5मिनट करें अच्छा अभ्यास होने पर समय बढ़ाते जायें।
शरीर मे वात बढ़ाने वाली चीजें जैसे चीकू, केला, पपीता, कद्दू, टिंडा, टमाटर, प्याज, मूली , उरद, राजमा, गोभी बैंगन परवल आदि न खायें।
ठण्डी चीजे व बासा भोजन न करे।
प्रतिदिन तिल के तैल की मालिश करे व सुबह की धूप अवश्य लें ।
आयुर्वेदिक उपचार:-
हारसिंगार(पारिजात) के पेड़ के 5-6 पत्ते लेकर उनकी चटनी बना ले और थोड़े गर्म पानी के साथ सुबह खाली पेट पी लें यह सभी प्रकार के जोड़ो के दर्द में सबसे कारगर नुख्सा है।
अखरोट व पानी मे रात को भिगोई हुई मेथी का चबाकर सेवन करने से भी आराम आता है।
आवश्यक निर्देश:-
यहाँ पर हम अत्यधिक लोगो को लाभ हो इसलिये पूरी चिकित्सा बता रहे है केवल खाने व एक दो चीजों का परहेज करने से थोड़ा ही लाभ हो सकेगा रोग को मूल से खत्म करने में सभी नियमों का पालन आवश्यक है।
घुटनो की समस्या और उसके लक्ष्ण कारण व उपचार | MyYogaSutra.in
आज की इस भागते- दौड़ते हुए जीवन में लोगो के सामने एक बहुत बडी समस्या नींद की भी है। हम यहाँ पर सही तरह से नींद लेने या ठीक ढंग से सोने के तरीकों को लेकर चर्चा करेंगे। क्योंकि सोने की तैयारी करने से पहले हमें जानना आवश्यक है कि हमें लेटना किस तरह से चाहिये। क्योंकि गलत ढंग से सोने के कारण भी अनेक व्यक्तियों को न ही ठीक प्रकार से नींद आती है, फिर वे पूरी रात ईधर से उधर करवट बदलते रहते है और यही कारण है कि ठीक से नींद पूरी न होने कारण वे तनाव आदि से ग्रसित भी देखे गये है बात यहीं समाप्त नही होती लोगो को सुबह उठते ही कमर ,गर्दन आदि में दर्द भी देखे गये है। इनकी वजह कुछ और नही बल्कि गलत ढंग से सोना ही है, ठीक ढंग से सोना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि ठीक प्रकार से भोजन करना।
क्या है सोने का सही तरीका? :-
- सबसे पहले सोने का आसन जहाँ आप सोते है वह स्थान समतल बिल्कुल सीधा होना चाहिये न ही ज्यादा गद्देदार और न ही अधिक ठोस होना चाहिये। इसके साथ- साथ ही वह स्थान साफ- सुथरा व शांतिपूर्ण भी होना आवश्यक है।
- हमें बिल्कुल सीधा पैरो में एक या डेढ़ फीट की दूरी बनाकर और अपने हाथों की हथेलियाँ आसमान की ओर फैलाकर सोने से बहुत अच्छी नींद आयेगी। इस तरह से सोना आपको कमर , गर्दन आदि के दर्द से भी बचाएगा।
- दूसरा यदि बायीं तरफ करवट लेकर सोना होतो आपका बायें पैर के ऊपर दायाँ पैर उसी तरह से रखना चाहिए जिससे हमारी कमर व गर्दन भी सीधी हो, और आपका बायां हाथ मोड़कर आपके सिर के नीचे आये जिससे आपकी गर्दन में दर्द न हो और आपको नींद भी अच्छी आये। उसी तरह दायीं तरफ से अगर लेटना चाहें तो बायां पैर दाएँ पैर के ऊपर व दायाँ हाथ सिर के नीचे होना चाहिये। इस प्रकार से सोने पर आप उचित नींद भी ले पायेंगे और आपको स्वास्थ्य लाभ भी होगा ।
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संक्षिप्त परिचय:-
ॐ शब्द तीन अक्षरों अ, उ और म से मिलकर बना है सरल रूप में इसे(ओ+उ+म) में भी देखा जा सकता है।
ॐ, हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार ॐ ईश्वर का मुख्य नाम है, इसलिये सभी मंत्रो की शुरुआत इस पवित्र नाम ॐ से ही मानी गयी है।
कहा जाता है ॐ शब्द इतना प्रभावी है की यह जिस मन्त्र के शुरुआत में आता है , उस मन्त्र की शक्ति को कईं गुणा बढ़ा देता है।
आधुनिक विज्ञान भी ॐ शब्द के उच्चारण और इससे होने वाले प्रभावों व लाभ को मान चुके है।
इसी आधार पर ॐ शब्द के उच्चारण से होने वाली ध्वनि व कम्पन्न से मानव शरीर व बाह्य वातावरण में होने वाले सकारात्मक परिवर्तन को देखा गया।
ॐ के उच्चारण से उत्पन्न ध्वनि व ऊर्जा ,ब्रह्माण्डीय ध्वनि (universal sound) व ब्रह्माण्डीय ऊर्जा (cosmic energy) से मेल खाती है।
ईश्वर ने तो सृष्टि की उत्पत्ति भी ओंकारमयी बनाई है ऐसा माना जाता है।
ॐ का उच्चारण करने के लिये सबसे पहले हमें किसी आसन पद्मासन ,सुखासन या सिद्धासन में बैठ जाये और अपने हाथ की तर्जनी उँगली व अँगूठे के सिरे को आपस मे मिला ले ,फिर गहरी श्वास भरे यदि आसन में न बैठ सके तो कुर्सी आदि पर बैठ जाये। किन्तु यहाँ ध्यान देने योग्य यह बात होगी कि हम किसी भी स्थिति में बैठे लेकिन अपनी रीढ़ व गर्दन को सीधा करके बैठना आवश्यक है। जिससे आप अपने फेफड़ो में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सिजन भर सके। अब ॐ के उच्चारण के लिये ओ- शब्द को जितनी भी देर बोल सके उ- को उससे 3 गुणा ज्यादा देर तक बोले और म को मुँह बन्द करके नाक, कान और मस्तिष्क में गूँजने के साथ म के समानांतर बोलना चाहिये।
कहा जाता है ॐ शब्द इतना प्रभावी है की यह जिस मन्त्र के शुरुआत में आता है , उस मन्त्र की शक्ति को कईं गुणा बढ़ा देता है।
आधुनिक विज्ञान भी ॐ शब्द के उच्चारण और इससे होने वाले प्रभावों व लाभ को मान चुके है।
इसी आधार पर ॐ शब्द के उच्चारण से होने वाली ध्वनि व कम्पन्न से मानव शरीर व बाह्य वातावरण में होने वाले सकारात्मक परिवर्तन को देखा गया।
ॐ के उच्चारण से उत्पन्न ध्वनि व ऊर्जा ,ब्रह्माण्डीय ध्वनि (universal sound) व ब्रह्माण्डीय ऊर्जा (cosmic energy) से मेल खाती है।
ईश्वर ने तो सृष्टि की उत्पत्ति भी ओंकारमयी बनाई है ऐसा माना जाता है।
विधि:-
ॐ का उच्चारण करने के लिये सबसे पहले हमें किसी आसन पद्मासन ,सुखासन या सिद्धासन में बैठ जाये और अपने हाथ की तर्जनी उँगली व अँगूठे के सिरे को आपस मे मिला ले ,फिर गहरी श्वास भरे यदि आसन में न बैठ सके तो कुर्सी आदि पर बैठ जाये। किन्तु यहाँ ध्यान देने योग्य यह बात होगी कि हम किसी भी स्थिति में बैठे लेकिन अपनी रीढ़ व गर्दन को सीधा करके बैठना आवश्यक है। जिससे आप अपने फेफड़ो में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सिजन भर सके। अब ॐ के उच्चारण के लिये ओ- शब्द को जितनी भी देर बोल सके उ- को उससे 3 गुणा ज्यादा देर तक बोले और म को मुँह बन्द करके नाक, कान और मस्तिष्क में गूँजने के साथ म के समानांतर बोलना चाहिये।
लाभ:-
- प्रतिदिन ॐ का उच्चारण करने से श्वास सम्बन्धी समस्याओ का निवारण होता है।
- ॐ के उच्चारण से हम थाइरॉइड से सम्बंधित बीमारियों से निजात पा सकते है
- ॐ के उच्चारण से होने वाले कम्पन्न से हमारी रीढ की हड्डी व पाचन क्रिया सीधी प्रभावित होती है।
- अतः रीढ व पाचन सम्बन्धी रोगो में भी लाभप्रद है।
- ॐ का उच्चारण नियमित रूप से करने वाले निद्रा आदि समस्याओं से दूर रहते है।
- अतः यह निद्रा व तनाव जैसी मानसिक सम्बन्धी समस्याओं को भी दूर करता है।
- ॐ के उच्चारण से हमारा मन शान्त होने के साथ ही हम अपने अन्दर सकारात्मक ऊर्जा व स्फूर्ति का अनुभव करते है।
जाने क्या है ॐ का उच्चारण करने की विघि और उसके लाभ ? | MyYogaSutra.in
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